ma mast-o-kharab

मा मस्त-ओ-ख़राब अज़ मय-ए-माशूक़-ए-अलस्तेम
ज़ाँ मस्त-ए-अलस्तेम कि मा’शूक़ परस्तेम

गर ख़िर्क़:-ओ-सज्जाद: न-बाशद न-बुवद पाक
चूँ बा मय-ओ-माशूक़ ब-ख़ल्वत ब-नशिस्तेम

चे कुफ़्र व चे ईमाँ चू ब-मक़्सूद रसीदेम
चे सोमआ’ चे दैर कि अज़ ईं हम: रस्तेम

शेरानः ज़े-मुल्क-ए-दो-जहाँ पा-ए-कशीदेम
ईं लहज़ः कि बा-दिलबर-ए-ख़ुद दस्त ब-दस्तेम

‘रूमी’ ब-सर-ए-राह-ए-मलामत शुद व ब-नशिस्त
ऐ ख़ल्क़ ब-दानेद कि मा आ’शिक़-ए-मस्तेम

Read More...

bahut kathin hai dagar pnghat ki

बहुत कठिन है डगर पनघट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी

पनिया भरन को मैं जो गई थी
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी

बहुत कठिन है डगर पनघट की
‘ख़ुसरव’ निज़ाम के बल-बल जइए

लाज रखो मेरे घूँघट पट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
बहुत कठिन है डगर पनघट की

Read More...

tori surat ke balihari nizam

तोरी सूरत के बलिहारी निजाम
तोरी सूरत के बलिहारी
सब सखियन में चुनर मेरी मैली
देख हँसें नर-नारी निजाम

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे
पिया रख ले लाज हमारी निजाम

सदक़: बाबा-‘गंज-शकर’ का
रख ले लाज हमारी निजाम

‘क़ुतुब-फ़रीद’ मिल आए बराती
‘ख़ुसरव’ राज-दुलारी निजाम

कोऊ सास कोऊ ननद से झगड़े
हम को आस तिहारी निजाम
तोरी सूरत के बलिहारी निजाम

Read More...

Mohe apne hi rang me rangde

मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही

हमरी चदरिया पिया की पगरिया दोनों बसंती रंग दे
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही

जो तू माँगे रंग की रंगाई मेरा जोबन गिरवी रख ले
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही

आन परी तोरे दरवाजे पर मिरी लाज-शरम सब रख ले
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही

‘निजामुद्दीन-औलिया’ हैं पीर मेरो प्रेम पीत का संग दे
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही

Read More...

Ashiqi Kalam Bandanwaz Gesudraz

वाहिद अपने आप था आपे आप निझाया।
परकट जलवे कारने, अलिफ मीम हो आया।।
इश्कौ जलवा देने कर, काफ नून बसाया।।

सवाल- जाती ईमान कौन सा और सिफाती ईमान कौन?
जवाब- अखंड हाल साविती है सो जाती ईमान वह है।
साविती जाती और जाती है सो सिफाती ईमान।।

कहाँलक खींचिया रहेगा तू, दुनिया की परेशानी।
जियेलक फिकर है, दुनिया की, दुनिया देखे तो है फानी।।

Read More...

ba-khuda ghair-e-khuda

ब-ख़ुदा ग़ैर-ए-ख़ुदा दर दो-जहाँ चीज़े नीस्त
बे-निशानस्त कज़ू नाम-ओ-निशाँ चीज़े नीस्त

हस्ती-ए-तुस्त हिजाब-ए-तू दिगर न पैदा-अस्त
कि ब-जुज़ दोस्त दरीं पर्दः निहाँ चीज़े नीस्त

चंद महजूब-नशीनी ब-गुमान-ए-दीगराँ
ख़ेमा दर कू-ए-यक़ीं ज़न कि गुमाँ चीज़े नीस्त

बंदा-ए-इश्क़ शुदी तर्क-ए-नसब कुन ‘जामी’
कि दरीं राह फुलाँ इब्न-ए-फुलाँ चीज़े नीस्त

Read More...

Az yar-e-kuhan nami kuni yaad

अज़ यार-ए-कुहन नमी कुनी याद
ईं शेवा-ए-नौ मुबारकत-बाद

फ़रियाद-ए-कसे नमी कुनी गोश
पेश कि कुनेम अज़ तू फ़रियाद

आँ सोख़्ता याफ़्त लज़्ज़त-ए-इश्क़
कज़ वस्ल-ए-निशाँ न-दीद व जाँ दाद

बा दौलते बंदगियत हस्तम
अज़ ख़्वाजगी-ए-दो-आलम आज़ाद

मुर्ग़-ए-चमन-ए-वफ़ा अस्त ‘जामी’
दर दाम-ए-ग़म-ओ-बला चे उफ़्ताद

Read More...

sahara maujo ka le le ke bad raha ho

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं
सफ़ीना जिस का है तूफ़ाँ वो नाख़ुदा हूँ मैं

ख़ुद अपने जल्वा-ए-हस्ती का मुब्तला हूँ मैं
न मुद्दई हूँ किसी का न मुद्दआ हूँ मैं

कुछ आगे आलम-ए-हस्ती से गूँजता हूँ मैं
कि दिल से टूटे हुए साज़ की सदा हूँ मैं

पड़ा हुआ हूँ जहाँ जिस तरह पड़ा हूँ मैं
जो तेरे दर से न उठ्ठे वो नक़्श-ए-पा हूँ मैं

जहान-ए-इश्क़ में गो पैकर-ए-वफ़ा हूँ मैं
तिरी निगाह में जब कुछ नहीं तो क्या हूँ मैं

तजल्लियात की तस्वीर खींच कर दिल में
तसव्वुरात की दुनिया बसा रहा हूँ मैं

जुनून-ए-इश्क़ की नैरंगियाँ अरे तौबा
कभी ख़ुदा हूँ कभी बंदा-ए-ख़ुदा हूँ मैं

बदलती रहती है दुनिया मिरे ख़यालों की
कभी मिला हूँ कभी यार से जुदा हूँ मैं

हयात ओ मौत के जल्वे हैं मेरी हस्ती में
तग़य्युरात-ए-दो-आलम का आइना हूँ मैं

तिरी अता के तसद्दुक़ तिरे करम के निसार
कि अब तो अपनी नज़र में भी दूसरा हूँ मैं

बक़ा की फ़िक्र न अंदेशा-ए-फ़ना मुझ को
तअय्युनात की हद से गुज़र गया हूँ मैं

मुझी को देख लें अब तेरे देखने वाले
तू आइना है मिरा तेरा आईना हूँ मैं

मैं मिट गया हूँ तो फिर किस का नाम है ‘बेदम’
वो मिल गए हैं तो फिर किस को ढूँढता हूँ मैं

Read More...