Is alam-e-vira me kya anjuman hai

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई

फैली हैं फ़ज़ाओं में इस तरह तिरी यादें
जिस सम्त नज़र उट्ठी आवाज़ तिरी आई

इक नाज़ भरे दिल में ये इश्क़ का हंगामा
इक गोशा-ए-ख़लवत में ये दश्त की पहनाई

औरों की मोहब्बत के दोहराए हैं अफ़्साने
बात अपनी मोहब्बत की होंटों पे नहीं आई

अफ़्सून-ए-तमन्ना से बेदार हुई आख़िर
कुछ हुस्न में बे-ताबी कुछ इश्क़ में ज़ेबाई

वो मस्त निगाहें हैं या वज्द में रक़्साँ है
तसनीम की लहरों में फ़िरदौस की रानाई

इन मध-भरी आँखों में क्या सेहर ‘तबस्सुम’ था
नज़रों में मोहब्बत की दुनिया ही सिमट आई

Read More...

Dil per wafa ka bojh uthate rahe hai hum

दिल पर वफ़ा का बोझ उठाते रहे हैं हम
अपना हर इम्तियाज़ मिटाते रहे हैं हम

मुँह पर जो ये जले हुए दामन की राख है
शो’लों में ज़िंदगी के नहाते रहे हैं हम

इतना न खुल सका कि हवा किस तरफ़ की है
सारे जहाँ की ख़ाक उड़ाते रहे हैं हम

आँखों से दिल तक एक जहान-ए-सुकूत है
सुनते हैं इस दयार से जाते रहे हैं हम

तेरा ख़याल माने-ए-अर्ज़-ए-हुनर हुआ
किस किस तरह से जी को जलाते रहे हैं हम

किस की सदा सुनी थी कि चुप लग गई ‘शहाब’
सातों सुरों का भेद गँवाते रहे हैं हम

Read More...

Baqt Ka Kafila Aata hai Guar jata Hai

वक़्त का क़ाफ़िला आता है गुज़र जाता है
आदमी अपनी ही मंज़िल में ठहर जाता है

एक बिगड़ी हुई क़िस्मत पे न हँसना ऐ दोस्त
जाने किस वक़्त ये इंसान सँवर जाता है

इस तरफ़ ऐश की शमएँ तो उधर दिल के चराग़
देखना ये है कि परवाना किधर जाता है

जाम-ओ-सहबा की मुझे फ़िक्र नहीं ऐ ग़म-ए-दिल
मेरा पैमाना तो अश्कों ही से भर जाता है

एक रिश्ता भी मोहब्बत का अगर टूट गया
देखते देखते शीराज़ा बिखर जाता है

हाल मेरे लिए है लम्हा-ए-आइंदा ‘नुशूर’
वक़्त शाएर के लिए पहले गुज़र जाता है

Read More...

Sari Duniya Hai Ek Parda-e-raaz

सारी दुनिया है एक पर्दा-ए-राज़
उफ़ रे तेरे हिजाब के अंदाज़

मौत को अहल-ए-दिल समझते हैं
ज़िंदगानी-ए-इश्क़ का आग़ाज़

मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िंदगी की उम्र दराज़

कोई आया तिरी झलक देखी
कोई बोला सुनी तिरी आवाज़

हम से क्या पूछते हो हम क्या हैं
इक बयाबाँ में गुम-शुदा आवाज़

तेरे अनवार से लबालब है
दिल का सब से अमीक़ गोशा-ए-राज़

आ रही है सदा-ए-हातिफ़-ए-ग़ैब
‘जोश’ हमता-ए-हाफ़िज़-ए-शीराज़

Read More...

Jindagi ka bo fasana na raha

ज़िन्दगी का वाे फ़साना ना रहा ,
दिल भी अब ये दीवाना ना रहा !

भीगें बरसातों में सोचा बरसों से ,
आज पर मौसम सुहाना ना रहा !

बेरूखियों से लफ़्ज भी गूँगे हुए ,
और वो दिलकश तराना ना रहा !

परछाँईयाँ पलकों में धुँधली हुई ,
कनखियों का मुस्कुराना ना रहा !

क्यूँ सुनाऊँ तुमको मैं शिकवे गिले ,
प्यार जब अपना पुराना ना रहा !

Read More...

Ya Hussain Ya Hussain

आया न होगा इस तरह हुस्नो-शबाब रेत पर
गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

जान-ए-बतूल के सिवा कोई नहीं खिला सका
कतरा-ए-आब के बग़ैर इतने गुलाब रेत पर

जितने सवाल इश्क़ ने आले-रसूल से किये
एक के बाद एक दिये सारे जवाब रेत पर

इश्क़ में क्या बचाइये, इश्क़ में क्या लुटाइये
आले-नबी ने लिख दिया सारा निसाब रेत पर

प्यासा हुसैन को कहूं इतना तो बे-अदब नहीं
लमसे लबे हुसैन को तरसा है आब रेत पर

आले-नबी का काम था, आले-नबी ही कर गए
कोई न लिख सका अदीब ऐसी किताब रेत पर

Read More...

gaflat me kati mori sari umariya

ए सबा ! मुस्तफ़ा से जा केहना ग़म के मारे सलाम केहते हैं
सब्ज़ गुम्बद की उन बहारों को दिल हमारे सलाम केहते हैं

सब्ज़ गुम्बद का आँख में मन्ज़र और तसव्वुर में आप का मिम्बर
सामने झालीयां है रोज़े की, दिल हमारे सलाम केहते हैं

अल्लाह अल्लाह ! हुज़ूर के गेसू, भीनी भीनी महकती वो खुश्बू
जिन से मा’मूर है फ़िज़ा हरसू, वो नज़ारे सलाम केहते हैं

जाइरे-तयबा तू मदीने में प्यारे आक़ा से इतना केह देना
आप की गर्दे-राह को आक़ा, दिल हमारे सलाम केहते हैं

ज़िक्र था आख़री महीने का, तज़किरा छिड़ गया मदीने का
हाजियो ! मुस्तफ़ा से केह देना, बे-सहारे सलाम केहते हैं

ग़म के बादल तमाम छटने लगे, परदे आँखों से सारे हटने लगे
जो तलातुम बने हुवे थे सोहेल, वो किनारे सलाम केहते हैं

Read More...

gaflat me kati mori sari umariya

ग़फ़लत में कटी मोरी सकरी उमरिया
करो मो पे अपनी दया ग़ौस-ए-आज़म

ज़माने में नहीं सुनता कोई फ़रियाद जीलानी
ख़ुदारा आप ही कीजे मेरी इमदाद जीलानी

करो इमदाद ऐ लख्ते-दिले-मुश्क़िल-कुशा-हैदर
गिरा हूँ ग़र्दिशों में, हूँ बड़ा नाशाद जीलानी

फ़साने ग़म के तुम से ना कहूं तो फिर कहूं किस से
मेरी सुन लो मेरी सुन लो मेरी रूदाद जीलानी

मेरी शाम-ए-ख़ज़ाँ सुब्हे-बहारा में बदल जाए
रुखे-पुरनूर दिखला कर करो तुम शाद जीलानी

समंदर में ग़मों के पाएगा ये साहिल-ए-तस्कीन
उजागर देख ले आ कर तेरा बग़दाद जीलानी

Read More...

Ye sab tumhara Karam hai Aaka ke baat ab tak bani huyi hai

कोई सलीका है आरज़ू का, न बन्दगी मेरी बन्दगी है
ये सब तुम्हारा करम है आक़ा के बात अब तक बनी हुई है

अता किया मुझको दर्दे-उल्फ़त, कहां थी ये पुर-ख़ता की क़िस्मत
मैं इस करम के कहां था क़ाबिल, हुज़ूर की बन्दा परवरी है

इस करम का करूँ शुक्र कैसे अदा, जो करम मुझ पे मेरे नबी कर दिया
मैं सजाता हूँ सरकार की महफिलें, मुझ को हर ग़म से रब ने बरी कर दिया

ज़िक्रे-सरकार की हैं बड़ी बरकतें, मिल गई राहतें, अज़मतें, रिफ़अतें
कोई सिद्दिक़, फ़ारूक़, उस्मां हुवे और किसीको नबी ने अली कर दिया

तजल्लियों के कफील तुम हो, मुरादे-क़ल्बे ख़लील तुम हो
ख़ुदा की रोशन दलील तुम हो, ये सब तुम्हारी ही रोशनी है

किसी का एहसान क्यूं उठाएं, किसी को हालात क्यूं बताएं
तुम्हीं से मांगेंगे तुम ही दोगे, तुम्हारे ही दर से लो लगी है

अमल की मेरे असास क्या है, बजुज़ नदामत के पास क्या है
रहे सलामत बस आप की निस्बत, मेरा तो बस आसरा यहीं है

जितना दिया सरकार ने मुझ को उतनी मेरी औक़ात नहीं
ये तो करम है उनका वरना मुझ में तो ऐसी बात नहीं

इश्क़े-शहे-बतहा से पेहले मुफ़लिसो-ख़स्ताहाल था मैं
नामे-मुहम्मद के मैं क़ुरबां, अब वो मेरे हालात नहीं

गौर तो कर सरकार की तुझ पर कितनी ख़ास इनायत है
कौसर तू है इनका सनाख्वां ये मामूली बात नहीं

बशीर कहिये, नज़ीर कहिये, इन्हें सिराजे-मुनीर कहिये
जो सर बसर है कलामे-रब्बी, वो मेरे आक़ा की ज़िन्दगी है

यहीं है ख़ालिद असासे-रहमत, यहीं है ख़ालिद बिनाए-अज़मत
नबी का इरफ़ान बन्दग़ी है, नबी का इरफ़ान ज़िन्दगी है

Read More...

Ya rab suye madina ban ke jau

या रब सूए मदीना मस्ताना बन के जाऊं
उस शमअे़-दो-जहां का परवाना बन के जाऊं

उनके सिवा किसी की दिल में न आरज़ू हो
दुनियां की हर तलब से बेगाना बन के जाऊं

हर गाम एक सजदा, हर गाम या ह़बीबी
इस शान, इस अदा का मस्ताना बन के जाऊं

पोहंचूं मदीने काश ! मैं इस बेख़ुदी के साथ
रोता फिरूं गली गली दीवानगी के साथ

जूं ही निग़ाह गुम्बदे-ख़ज़रा को चूमले
क़ुर्बान मेरी जान हो वारफ्तगी के साथ

मुझ को बक़ी-ए-पाक में दो गज़ ज़मीं मिले
या रब दुआ है तुझ से मेरी आजिज़ी के साथ

या रब सूए मदीना मस्ताना बन के जाऊं
उस शमए-दो जहां का परवाना बन के जाऊं

बेहज़ाद अपना आलम समझेगा क्या ज़माना
है फ़ेहम का तकाज़ा दीवाना बन के जाऊं

Read More...