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AAJ KI SHAYARI

Bikhar jayege hum kya tamasha khatam hoga

बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगा
मिरे मा’बूद आख़िर कब तमाशा ख़त्म होगा
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Mere raste me maikada pada

जब मेरे रास्ते में कोई मय-कदा पड़ा
इक बार अपने ग़म की तरफ़ देखना पड़ा
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To phool ki manid N shabnam ki tarah aa

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ
अब के किसी बे-नाम से मौसम की तरह आ
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Sakiya to ne mere zarf ko samjha kya

साक़िया तू ने मिरे ज़र्फ़ को समझा क्या है
ज़हर पी लूँगा तिरे हाथ से सहबा क्या है
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Koi Sahara na raha

कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा
हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा
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Jo samjhate bhi aa kar wise-e-barham

जो समझाते भी आ कर वाइज़-ए-बरहम तो क्या करते
हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ का ग़म तो क्या करते
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Shikasta Haal sa be Aasra sa lagta hai

शिकस्ता-हाल सा बे-आसरा सा लगता है
ये शहर दिल से ज़ियादा दुखा सा लगता है
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Wahi Pyas hai wahi dast hai

वही प्यास है वही दश्त है वही घराना है
मश्कीज़े से तीर का रिश्ता बहुत पुराना है
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Dil ki Awaaz me Awaaz milate rahe

दिल की आवाज़ में आवाज़ मिलाते रहिए
जागते रहिए ज़माने को जगाते रहिए
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Jana Kaha tha aur Kaha se chale the hum

जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से हम
बेदार हो गए किसी ख़्वाब-ए-गिराँ से हम
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