Hindi Quotes in Hindi

मैं तुम्हें इसलिए सलाह नहीं दे रहा कि मैं ज़्यादा समझदार हूँ
बल्कि इसलिए दे रहा हूँ कि मैंने ज़िंदगी में ग़लतियाँ तुमसे ज़्यादा की हैं

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Bu Ali Shah Qalandar Quotes

रवम दर बुत-कदा शैनम ब-पेश-ए-बुत कुनम सज्द:
अगर याबम ख़रीदारे फ़रोशम दीन-ओ-ईमाँ रा

फ़्रोज़म आतिशे दर दिल ब-सोज़म क़िब्लः-ए-आलम
पस आँगह क़िब्ल: साज़म मन ख़म-ए-अबरू-ए-ख़ूबाँ रा

सरम पेचाँ दिलम पेचाँ मनम पेचीद:-ए-जानाँ
‘शरफ़’ चूँ मार मी पेचद चे बीनी मार-ए-पेचाँ रा

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Bulleh Shah Quotes

पत्तियां लिखूंगी मैं शाम नूं, पिया मैनूं नज़र ना आवे ।
आंगन बना ड्राउणा, कित बिध रैन वेहावे ।

कागज़ करूं लिख दामने, नैन आंसू लाऊं ।
बिरहों जारी हौं जारी, दिल फूक जलाऊं ।

पांधे पंडत जगत के, पुच्छ रहियां सारे ।
बेद पोथी क्या दोस है, उलटे भाग हमारे ।
नींद गई किते देस नूं, उह भी वैरन हमारे ।

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Shams Tabrez Quotes

“परिवर्तनों का विरोध करने के बजाय, आत्मसमर्पण करें।
जीवन को तुम्हारे साथ होने दो, तुम्हारे खिलाफ नहीं।
अगर आपको लगता है कि तुम मेरा जीवन उल्टा हो जाएगा,
तो यह चिंता की बात नहीं है।
आप कैसे जानते हैं कि उल्टा बेहतर नहीं है? ”

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Mullana Jami Quotes

ईश्वर और प्रेम शरीर और आत्मा के रूप में हैं।
ईश्वर मेरा है, प्रेम हीरा है।
वे साथ रहे हैं शुरुआत से
हर धड़कन में, हर दिल में।

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amir khusro quotes

खुसरो बाजी प्रेम की,
मैं खेलूं पी के संग।
जीत गई तो पी मेरे,
हारी तो पी के संग।।

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

बल बल जाऊं मैं, तोरे रंग रेजवा;
अपनी सी रंग दीन्ही रे, मोसे नैना मिलाइके।

नदी किनारे मै खड़ी सो पानी झिलमिल होए।
पी गोरी मैं सांवरी , अब किस विध मिलना होय।।

अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।।

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जा रोयेंगे, जैसे रणरेही का खेत।

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढांप तोहे दूं।
न मैं देखूं और न कोई, न तोहे देखन दूं।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चंद्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैन।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़े मोहे को चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिंदू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

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Quotes Bandanwaz Gesudraz

देखो वाजिद तनकी चक्की पीड़ चातुर होके सक्की
सौनक इबलीस खिंच खिंच थक्की के या बिस्मिल्लाह अल्ला हो

अलिफ़ अल्ला उसका दिसता म्याने मुहम्मद होकर बसता
पंछी तलब योंकू दिसता के या बिस्मिल्लाह

बन्दानावाज़ बंद हुसेनी सो बंदगी में रहते या बिस्मिल्लाह अल्ला हो

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Farman Sheikh Saadi

वह आदमी वास्‍तव में बुद्धिमान है जो क्रोध में भी गलत बात मुंह से नहीं निकालता। —शैख़ सादी

लोभी को पूरा संसार मिल जाए तो भी वह, भूखा रहता है, लेकिन संतोषी का पेट, एक रोटी से ही भर जाता है। —शैख़ सादी

ग़रीबों के समान विनम्र अमीर और अमीरों के समान उदार ग़रीब ईश्वर के प्रिय पात्र होते हैं। —शैख़ सादी

घमंड करना जाहिलों का काम है। —शैख़ सादी

जो नसीहतें नहीं सुनता, उसे लानत-मलामत सुनने का सुख होता है। —शैख़ सादी

बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बन्द करना ही अच्छा है। —शैख़ सादी

खुदा एक दरवाजा बन्द करने से पहले दूसरा खोल देता है, उसे प्रयत्न कर देखो। —शैख़ सादी

धैर्य रखें, सभी कार्य सरल होने से पहले कठिन ही दिखाई देते हैं। —शैख़ सादी

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Urdu Quotes Sheikh Saadi

सुन्दरता बिना श्रृंगार के मन मोहती है | —शैख़ सादी

जो असहायों पर दया नहीं करता, उसे शक्तिशालियों के अत्याचार सहने पड़ते हैं। —शैख़ सादी

गुरु की डांट-डपट पिता के प्यार से अच्छी है | —शैख़ सादी

अगर इन्सान सुख-दुःख की चिंता से ऊपर उठ जाए, तो आसमान की ऊंचाई भी उसके पैरों तले आ जाय। —शैख़ सादी

इंसान अगर लोभ को ठुकरा दे तो बादशाह से भी ऊंचा दर्जा हासिल कर सकता है, क्‍योंकि संतोष ही इंसान का माथा हमेशा ऊंचा रख सकता है। —शैख़ सादी

अज्ञानी आदमी के लिये खामोशी से बढ़कर कोई चीज नहीं, और अगर उसमें यह समझने की बुद्धि है तो वह अज्ञानी नहीं रहेगा। —शैख़ सादी

वाणी मधुर हो तो सब कुछ वश में हो जाता है, अन्‍यथा सब शत्रु बन जाते हैं। —शैख़ सादी

 

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Hindi Quotes Sheikh Saadi

संसार में लालची आँखों को सब्र ही भर सकता है या फिर कब्र की मिट्टी —शैख़ सादी

“ऐ सन्तोष! मुझे दौलतमंद बना दें, क्योंकि संसार की कोई दौलत तुझसे बढ़कर नहीं है।” —शैख़ सादी

अल्पाहार करने वाला आसानी से तकलीफों को सहन कर लेता है। पर जिसने सिवाय शरीर पालने के और कुछ किया ही नहीं, उस पर सख्ती की जाती है तो वह मर जाता है।”  —शैख़ सादी

चरित्र-हीन मूर्ख-चरित्र-हीन विद्वान् से अच्छा है, क्योंकि मूर्ख तो अन्धा होने के कारण पथभ्रष्ट हुआ, पर विद्वान् दो आँखें रखते हुए भी कुएं में गिरा।—शैख़ सादी

अपने पड़ौसी भिक्षुक से आग मत माँग, उसकी चिमनी से जो धुँआ तू निकलता देखता है, वह लौकिक आग का नहीं बल्कि उसके हृदय में सुलगी हुई दुख की आग का है।—शैख़ सादी

यदि तेरा मृत्यु-समय उपस्थित नहीं हुआ है तो शेर या चीते के मुँह में पहुँच कर भी तू जिन्दा रह सकता है।—शैख़ सादी

जो दूसरे को देखकर जलता है, उस पर जलने की जरूरत नहीं, क्योंकि दाह-रूपी शत्रु उसके पीछे लग रहा है। उससे शत्रुता करने की हमें फिर क्या जरूरत है।—शैख़ सादी

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