maula ya salleh wasallam

सहर का वक़्त था मा’सूम कलियाँ मुस्कुराती थीं
हवाएं ख़ैर-मक़दम के तराने गुनगुनाती थी
अभी जिब्रील उतरे भी न थे काअ़बे के मिम्बर से
के इतने में सदा आई ये अब्दुल्लाह के घर से
मुबारक हो ! शहे-हर-दोसरा तशरीफ़ ले आए
मुबारक हो ! मुहम्मद मुस्तफा तशरीफ़ ले आए

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

मुह़म्मदुन सय्यिदुल-कौनैनी वस्सक़लयनि
वल्फरीक़यनि मिन उ़र्बि-व्व-मिन अ़जमी

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

वो मुह़म्मद फ़ख़्रे-आलम, हादी-ए-कुल-इन्स-ओ-जां
सरवरे-कोनैन, सुल्ताने-अरब, शाहे-अजम
एक दिन जिब्रील से कहने लगे शाहे-उमम
तूमने देखा है जहां, बतलाओ तो कैसे हैं हम?
अर्ज़ की जिब्रील ने ए शाहे-दीं ! ए मोह़तरम !
आपका कोई मुमासिल ही नहीं रब की क़सम

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

रसूलल्लाह, ह़बीबल्लाह, इमामल-मुर्सलीन
रसूलल्लाह, ह़बीबल्लाह, इमामल-मुर्सलीन

हुवल-ह़बीबुल्लज़ी तुरजा शफ़ाअ़तुहु
लिकुल्लि हौलि-म्मिनल-अहवालि मुक़्तह़िमि

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

मेरे मौला सदा तह़िय्यतो-दुरूद के गजरे
अपने मह़बूब पर जो है तेरी तख़लीक़ बेहतरीं
उसी महबूब से वाबस्ता उम्मीदे-शफ़ाअ़त है
के हर हिम्मत-शिकन-मुश्किल में जिस ने दस्तगीरी की
न कोई आप जैसा था, न कोई आप जैसा है
कोई युसूफ से पूछे मुस्तफ़ा का हुस्न कैसा है
ज़मीनो-आसमां में कोई भी मिसाल ना मिली

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

रसूलल्लाह, ह़बीबल्लाह, इमामल-मुर्सलीन
रसूलल्लाह, ह़बीबल्लाह, इमामल-मुर्सलीन

या रब्बि बिल-मुस्त़फ़ा बल्लिग़ मक़ास़िदना
वग़फिर लना मा मद़ा या वासिअ़ल-करमी

मौला या स़ल्ली व सल्लिम दाइमन अबदन
अ़ला ह़बीबिक ख़ैरिल-ख़ल्क़ि कुल्लिहिमि

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ye kon aaya jiska jikr h

करम के बादल बरस रहे हैं, दिलों की खेती हरी भरी है
ये कौन आया के ज़िक्र जिस का नगर नगर है गली गली है

ये कौन बन कर क़रार आया, ये कौन जाने-बहार आया
गुलों के चेहरे हैं निखरे निखरे, कली कली में शगुफ़्तगी है

दीये दिलों के जलाए रखना, नबी की महफ़िल सजाए रखना
जो राहते-दिल सुकूने-जां है, वो ज़िक्र ज़िक्रे-मुहम्मदी है

नबी को अपना ख़ुदा न मानो, मगर ख़ुदा से जुदा न जानो
है अहले-ईमां का ये अक़ीदा, ख़ुदा ख़ुदा है, नबी नबी है

न मांगो दुनिया के तुम ख़ज़ीने, चलो नियाज़ी चले मदीने
के बादशाही से बढ़के प्यारे ! नबी के दर की गदागरी है

करम के बादल बरस रहे हैं, दिलों की खेती हरी भरी है
ये कौन आया के ज़िक्र जिस का नगर नगर है गली गली है

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sukoon paya hai be kasi ne

सुकून पाया है बे-कसी ने, हुदूदे-ग़म से निकल गया हूँ
ख़याले-हज़रत जब आ गया है तो गिरते गिरते संभल गया हूँ

कभी मैं सुबहे-अज़ल गया हूँ, कभी मैं शामे-अबद गया हूँ
तलाशे-जानां में कितनी मंज़िल ख़ुदा ही जाने निकल गया हूँ

हरम की तपती हुई ज़मीं पर जिगर बिछाने की आरज़ू में
बहारे-ख़ुल्दे-बरी मिली तो बचा के दामन निकल गया हूँ

मेरे जनाज़े पे रोने वालो ! फ़रेब में हो, ब-गौर देखो
मरा नहीं हूँ, ग़मे-नबी में लिबासे-हस्ती बदल गया हूँ

ये शान मेरी, ये मेरी क़िस्मत, खुशा मुहब्बत ज़ए अक़ीदत
ज़ुबां पे आते ही नामे-नामी, अदब के सांचे में ढल गया हूँ

ब-फैज़े हस्सान इब्ने साबित, ब-रंगे-ना’ते-रसूले-रहमत
क़मर मैं शेरो-सुखन की लय में अदब के मोती उगल गया हूँ

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sarkaar sa pyara siddiq samara

परवाने को चराग़ तो बुलबुल को फ़ूल बस
सिद्दीक़ के लिये है ख़ुदा का रसूल बस

मुस्तफ़ा का हमसफ़र, अबू बकर, अबू बकर
गली गली नगर नगर, अबू बकर, अबू बकर
लुटाया जिसने अपना घर, अबू बकर, अबू बकर
एहसान जिस का दीन पर, अबू बकर, अबू बकर
है चर्चे जिस के अर्श पर, अबू बकर, अबू बकर
लगेगा नारा फर्श पर, अबू बकर, अबू बकर

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

दुनिया-ए-सदाक़त में तेरा नाम रहेगा
सिद्दीक़ तेरे नाम से इस्लाम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

सिद्दीक़ के गुस्ताख़ से तो जंग रहेगी
जो इन से जलेगा वोही नाकाम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

बे लोस मुहब्बत का सिला ख़ूब मिला है
ता-हश्र मुहम्मद के संग आराम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

हर नस्ल तेरे काम की तजदीद करेगी
जब तक रहेगी दुनिया तेरा नाम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

सिद्दीक़ के बाग़ी तो सदा रोते रहेंगे
खुश आशिक़े-सिद्दीक़ सुबहो-शाम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

सिद्दीक़ की बैअत जो की हसनैनो-अली ने
तारीख़ी फ़ैसला तो सरे आम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

अस्हाबे-नबी, आले-नबी दीन की पहचान
जो दिल का है अंधा वोही ग़ुमनाम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

हर अहद पे सिद्दीक़ का एहसान उजागर
बा’द अज़ नबी सिद्दीक़ का इकराम रहेगा

सालारे-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ा
सरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमारा
हर सुन्नी का नारा, सिद्दीक़ हमारा

परवाने को चराग़ तो बुलबुल को फ़ूल बस
सिद्दीक़ के लिये है ख़ुदा का रसूल बस

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badi shan h mustafa ki

बड़ी शान वाला मदीने का वाली
बड़े से बड़ा जिनके दर का सवाली

बड़ी शान वाला मदीने का वाली

फ़रिश्ते भी मेरी ज़बीं चूमते हैं
मैं जब चूम लूँ उनके रोज़े की जाली

बड़ी शान वाला मदीने का वाली

जहां में अनोखा है उनका मदीना
ज़माने में है उनकी चौखट निराली

बड़ी शान वाला मदीने का वाली

मिले उनकी रहमत की ख़ैरात सब को
गया कोई भी उनके दर से न खाली

बड़ी शान वाला मदीने का वाली

कहाँ ये हुज़ूरी, कहाँ मैं ज़हूरी
मैं अदना से अदना, वो आली से आली

बड़ी शान वाला मदीने का वाली
बड़े से बड़ा जिनके दर का सवाली

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nar-e-khawaza garib nawaz

नार-ए-ख़्वाजा, ग़रीब नवाज़, ग़रीब नवाज़
नार-ए-ख़्वाजा, ग़रीब नवाज़, ग़रीब नवाज़

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
जिस की है शहन्शाही अजमेर में बैठा है

मस्त-कलंदर, सूफ़ी, अत्तारी, क़ादरी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं
नक़्शबन्दी, सोहरवर्दी, चिश्ती, फरीदी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

आमदे-पंजतन हो रही है, हर तरफ रोशनी रोशनी है
सारे वलियों का मेला लगा है, मेरे ख़्वाजा पिया की छटी है

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

मिल गई मुझ को ख़्वाजा की निस्बत, मिल गई जैसे दुनिया में जन्नत
लाज रखी है ख़्वाजा पिया ने, खोटी क़िस्मत हमारी खरी है

जिस की है शहंशाही अजमेर में बैठा है

मस्त-कलंदर, सूफ़ी, अत्तारी, क़ादरी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं
नक़्शबन्दी, सोहरवर्दी, चिश्ती, फरीदी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

मस्त सूफ़ी क़लन्दर है आए, शाहे-संजर की महफ़िल सजी है
बट रहा है मुहम्मद का सदक़ा, झोली सब की भरी जा रही है

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

ज़िन्दगी मेरे ख़्वाजा के दम से, बस नवाज़ा करम ही करम से
मेरा मुर्शिद है अजमेर वाला, उनकी सूरत नज़र में बसी है

जिस की है शहन्शाही अजमेर में बैठा है

मस्त-कलंदर, सूफ़ी, अत्तारी, क़ादरी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं
नक़्शबन्दी, सोहरवर्दी, चिश्ती, फरीदी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

ज़िक्रे ख़्वाजा पिया का वज़ीफ़ा, मेरी बख़्शिश का है ये वसीला
पंजतन पाक का लाल है ये, बाग़े-ज़हरा की ये तो कली है

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

मस्त-कलंदर, सूफ़ी, अत्तारी, क़ादरी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं
नक़्शबन्दी, सोहरवर्दी, चिश्ती, फरीदी
ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं, ख़्वाजा ख़्वाजा कहते हैं

कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है
कोई नहीं है मुश्किल जब ख़्वाजा बादशाह है

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mera murshid ali maula

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

ज़िक्रे अली नेकी है यारो, है ये ज़िक्रे सहाबा
हैदर मौला, हैदर मौला, हर मोमिन का नारा
नारा मार के हैदर, जिए जा, जिए जा, जिए जा
इस्मे-आज़म है ये नारा, इस्मे-आज़म है ये नारा

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

हैदर जब मैदान में आते, दुश्मन भागते सारे
नाम अली का सुन के बुज़दिल, थर थर कांपते सारे
तेरे मुक़ाबिल जो आता, डर जाता, डर जाता, डर जाता
दबदबा है तेरा ऐसा, दबदबा है तेरा ऐसा

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

अली अली मौला अली, अली अली मौला
अली अली मौला अली, अली अली मौला

पैदा हो कर सब से पहले चेहरा नबी का देखा
जब आक़ा ने आप को चूमा, मन्ज़र कैसा होगा
झूम के दिल ने कहा मुर्शिद, मुर्शिद मेरा
वाह ! क़िस्मत तेरी वाह वाह !, वाह ! क़िस्मत तेरी वाह वाह !

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

माहे रजब की तेरहवीं आई, दिन जुम्मे का आया
काअबे में है किस की विलादत, शेर ख़ुदा का आया
आज अली है आया, आया, आया, आया
मुर्तज़ा है लक़ब जिस का, मुर्तज़ा है लक़ब जिस का

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

आक़ा ने आँखों में तेरी अपना लुआब लगाया
ख़ैबर में आक़ा ने झंडा हाथ में तेरे थमाया
एक ही बार में ख़ैबर, ख़ैबर उखाड़ा
फ़ातेह है अली मौला, फ़ातेह है अली मौला

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

हैदर मौला अली अली, अली अली मौला
हैदर मौला अली अली, अली अली मौला

शाहे-मर्दां तेरे दर पे बन के भिकारी आऊं
तेरे दर की मिट्टी को मैं अपना सुरमा बनाऊं
नौकरी तेरी करूँ मेरे मुर्शिद मौला
ये है इरफ़ान का अरमान, ये है इरफ़ान का अरमान

मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला
मेरा मुर्शिद अली मौला, मेरा मुर्शिद अली मौला

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teri jaliye ke niche

तेरी झालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साए
जिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

कैसी वहाँ की रातें, कैसी वहाँ की बातें
उन्हें पूछ लो नबी का जो मदीना देख आए

ना ये बात शान की है, ना ये बात माल-ओ-ज़र की
वही जाता है मदीने, आक़ा जिसे बुलाए

रोज़े के सामने मैं ये दुआएं मांगता था
मेरा दम निकल तो जाए, ये समां बदल न जाए

तयबा के ए मुसाफिर ! तुम्हें देता हूँ दुआएं
दरे-मुस्तफ़ा पे जा कर तू जहां को भूल जाए

वो ज़हूरी यार मेरा, वही ग़मगुसार मेरा
मेरी क़ब्र पर जो आ कर नात-ए-नबी सुनाए

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mehraz ki raat hain

आज मौला बख़्श फ़ज़्ले रब से है दूल्हा बना
ख़ुशनुमा फूलों का इस के सर पे है सेहरा सजा

इस की शादी ख़ाना आबादी हो रब्बे-मुस्तफ़ा
अज़ तुफ़ैले ग़ौसो-ख़्वाजा, अज़ पए अहमद रज़ा

इन की ज़ौजा या ख़ुदा ! करती रहे पर्दा सदा
अज़ तुफ़ैले हज़रते उस्मां ग़निय्ये बा हया

तू सदा रखना सलामत इन का जोड़ा किर्दिगार
इन को झगड़ों से बचाना अज़ तुफ़ैले चार यार

इन को खुशियां दो जहां में तू अता कर किब्रिया
कुछ न छाए इन पे ग़म की रंज की काली घटा

नेक औलाद इन को मौला आफ़ियत से हो अता
वासिता या रब मदीने की मुबारक ख़ाक का

इस तरह महका करे ये घर का घर प्यारे ख़ुदा
फूल महका करते हैं जैसे मदीने के सदा

या इलाही ! दे सआदत इन को हज की बार बार
बार बार इन को दिखा मीठे मुहम्मद का दियार

ये मियां बीवी रहें जन्नत में यक्जा ऐ ख़ुदा
या इलाही तुझ से है अत्तारे आजिज़ की दुआ

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salleh ala mohammadin

जिन का लक़ब है मुस्तफ़ा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
उन से हमें ख़ुदा मिला, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह
या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह

रूहुल-अमीं तो थक गए और वो अर्श तक गए
अर्शे-बरी पुकार उठा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

जिन का लक़ब है मुस्तफ़ा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
जिन का लक़ब है मुस्तफ़ा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

लाज गुनाहगार की आप के हाथ है नबी
बद है मगर है आप का, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

उन से हमें ख़ुदा मिला, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह
या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह

क़ब्र में जब फिरिश्ते आएं, शक्ले-ख़ुदा-नुमा दिखाएं
पढ़ता उठूं मैं या ख़ुदा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

जिन का लक़ब है मुस्तफ़ा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
जिन का लक़ब है मुस्तफ़ा, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

हश्र में सालिके-हज़ीं, थाम के दामने-नबी
अर्ज़ करे ये बर-मला, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

उन से हमें ख़ुदा मिला, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह
या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह

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