Game isk rahe gaya hai game justaju ban kar Hindi ghazal

ग़मे इश्क रहे गया है, ग़मे जुस्तजू में ढलकर
वो नज़र से छुप गए है, मेरी ज़िन्दगी बदल कर

तेरी गुफ्तगू को नासे दिले गम-ज़दा से जल कर
अभी तक तो सुन रहा था मगर अब ज़रा संभल कर

न मिला सुरागे मंज़िल कहीं उम्र भर किसी का
नज़र आ गयी है मंज़िल कहीं दो कदम ही चल कर

ग़मे उम्र मुख़्तसर से अभी बे खबर है कलियाँ
न चमन में फेक देना किसी फूल को मसल कर

है किस के मुन्तज़िर हम मगर ए उम्मेदे मबहम
कहीं वक्त रहे न जाये यूही करबटें बदल कर

मेरी तेज़-गामियूं से नहीं वर्क को भी निस्बत
कहीं खो न जाये दुनया मेरे साथ साथ चल कर

कभी यक-बा-यक तबज्जो कभी दफ़अतन तगाफुल
मुझे आज़मा रहा है कोई रुख बदल बदल कर

हैं शकील ज़िन्दगी में ये जो बुसअतें नुमायाँ
इन्ही बुसअतें से पैदा कोई आलमे ग़ज़ल कर

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Azal ke din jinhe le kar chale the teri mahfil se

अज़ल के दिन जिन्हे ले कर चले थे तेरी महफ़िल से
वो शोला आज तक लिपटे हुआ है दामाने दिल से

मुझे अब खोफ ही क्या हिजर में तन्हाई दिल से
हज़ारो महफिले ले कर उठा हु तेरी महफ़िल से

ये आलम है हुजुमे शोक में बे ताबी दिल से
के मंज़िल पर पहुंच कर भी उडा जाता हु मंज़िल से

फलक पर दुबे जाते है तारे भी शबे फुरकत
मगर निस्बत कहा उनको मेरे दुबे हुए दिल से

निगाहे कैस की उठी है जोशे कैफ मस्ती में
ज़रा होशयार रहना सारबा लैला की मैफिल में

समझ कर फूकना उस को ज़रा ए दागे न कामी
बहुत से घर भी है आबाद उस उजड़े हुए दिल में

मोहब्बत में कदम रखते ही गुम होना पड़ा मुझको
निकल आये हज़ारो मंज़िले एक ही मंज़िल से

क़यामत क्या,कहाँ का हश्र,क्या दैर,क्या काबा
ये सब हंगामा बरपा है, मेरे एक मुज़्तरिब दिल

बयां क्या हो यहाँ की मुस्किले बस मुक्तसर ये है
वही अच्छे है, कुछ जो जिस कदर है दूर मंज़िल से

हुजुमे यास एसा कुछ नज़र नहीं मुझको
बाफुरे शौक़ में आगे बढ़ा जाता हु मंज़िल से

मोहब्बत में ज़रूरत ही तलाशे गैर की क्या थी
अगर हम ढूंढ़ते नस्तर भी मिल जाता रगे गुल से

बदन से जान भी हो जाएगी रुखसत जिगर लेकिन
न जायेगा ख़याले हज़रते असगर मेरे दिल से

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Mareze gam ke saharo koi to baat karo Hindi-ghazal

मरीज़े गम के सहारो, कोई तो बात करो
उदास चाँद सितारों, कोई तो बात करो

कहा है, डूब चूका अब तो डूब ने वाला
सिकिस्ता दिल से किनारो, कोई तो बात करो

मेरे नसीब को बर्बादियों से निस्बत है
लूटी हुयी सी बहरो,कोई तो बात करो

कहाँ गया वो तुम्हारा बुलंदी-यो का जुनूँ
भुजे भुजे से शरारो कोई तो बात करो

इसी तरह से अजब क्या जो कुछ सुकून मिले
गेम फ़िराक के मारो कोई तो बात करो

तुम्हारा गम भी मिटाती है मस्तियाँ के नहीं
शराबे नाब के मारो कोई तो बात करो

तुम्हारी खाक उडाता नहीं सकेब तो क्या
उदास रहे गुज़र कोई तो बात करो

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Hindi Ghazal mansob the jo log meri zindagi ke sath Hindi ghazal

मंसूब थे जो लोग, मेरी ज़िन्दगी के साथ
अक्सर वही मिले है, बड़ी बे रूखी के साथ

यूँ तो मैं हस पड़ा हूँ, तुम्हारे लिए मगर
कितने सितारे टूट पड़े, एक हसी के साथ

फुर्सत मिले तो अपना गिरेबान भी देख ले
ए दोस्त यूँ न खेल मेरी ज़िन्दगी के साथ

मजबूरियो की बात चली है तो मय कहा
हम ने पिया ज़हर भी अक्सर खुसी के साथ

चेरे बदल बदल कर मिल रहे है लोग
इतना बुरा सुलूक मेरी सादगी के साथ

एक सज्दए खुलूस की कीमत फ़िज़ाए खुल्द
या रब न कर मज़ाक मेरी बंदगी के साथ

मोसिन करम लय भी हो जिसमे खुलूस भी
मुझको ग़ज़ब का प्यार है उसी दुश्मनी के साथ

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hindi shayri ey khuda aaj ye fasla kar de

अय खुदा आज ये फैसला कर दे,
मुझे उसका या उसे मेरा कर दे
बहुत दुख सहे है उसकी खातिर,
अब कोई खुसी मेरे मुकद्दर कर दे,
या ख़तम कर ये जिंदिगानी,
और मुझे फ़ना कर दे

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Nukta-che hai game dil usko sunaye na bane hindi-ghazal

नुकता ची है,ग़मे दिल उसको सुनाएँ ना बने
क्या बने बात,जहाँ बात बनाएँ ना बने |

मैं बुलाता तो हू उसको,मगर ए ज़ज़्बा-ए-दिल
उसपे बन जाएँ कुछ ऐसी,के बिन आएँ ना रहे |

खेल समझाँ है, कहीं छोड़,ना दे भूल ना जाएँ |
काश यू भी हो के बिन मेरे सताएँ ना बनें |

गैर फिरता है लिए यू तेरे ख़त को के अगर
कोई पूछे के ये क्या है,तो छुपाएँ ना बने |

उस नज़ाकत का बुरा हो,वो भले है तो क्या
हाथ आबे तो इन्हे हाथ लगाएँ ना बने |

कहे सके कौन के ये जलवा-गरि किस की है
परदा छोड़ा है, वो उसने के उठाएँ ना बने |

मौत की रहा देखु,के बिन आएँ ना रहे
तुम को चाहूं के ना तो बुलाएँ ना बने |

बोज वो सर से गिरा है,के उठाएँ ना बने
काम वो आन पड़ा है,के बनाएँ ना बने |

इस्क पर ज़ोर नही है,ये वो आतिश है ग़ालिब
के लगाएँ ना लगे,और भुजाएँ ना भुजे |

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Na kahin sahare maharaban ki hawa ghazal-in-hindi

ना कहीं सहेरे,माहेर-बाँ की हवा
ना कोई यारे हम-दम,बा-दम सार|

ना सारे बांम जुल्फे आवारा
ना सारे राह चस्मे,फितना तराज़|

ना कहीं कुएँ चाक दामन
ना कहीं रुए,दोस्ताने फ़राज़|

ना कोई बैतेय,बे-दिल,बा ग़ालिब
ना कोई शाएरे,हाफिज़े सिराज़ी|

ना कोई शम्मा कुस्तये शब है
ना कोई अन्द-लीब सीना गुदाज़|

खिल्बते गम ,ना बाज़मे रुसबाई
ना सवाले तलब, ना अर्ज़े नियाज़

चार सू एक फ़ासले बे दर है
चार जानिब हिसारे बे अंदाज़|

नींद के तयिरने बे परवहा
शाके मशरगा से कर गये परवाज़|

एसी वीरानी-यो से घबरा कर
जब उठता हू,तेरी याद का साज़|

तोड़ देती है सिलसिले सारे
पहेरे-दारो की बद नुमा आवाज़

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yun to hone ko gulistan bhi hai birana bhi hindi-ghazal

यू तो होने को गुलिस्ताँ भी है बिराना भी है
देखना ये है, के हम मे कोई दीवाना भी है|

बात सदा ही सही, लेकिन हकीमा भी है
यानी हर इंसान बा-कद्रे होश दीवाना भी है|

होशयार,ओ-मस्ते,साहेबा-ए-तागाफूल,होशयार
इस्क की फ़ितरत मे एक शाने हारीफना भी है|

होश मे रहता तो क्या जाने कहाँ रखता क़दम
ये गनीमत है, मज़ा-ज़ा इस्क दीवाना भी है|

किस जगह वाकीया हुया है हज़रते वाइज़ के घर
दूर मस्जिद भी नही नज़दीक मयखना भी है|

मिलता जुलता है मिज़ाज़े हुस्सैन ही से रंगे इस्क
शम्मा गर बे-बाक है गुस्ताक़ परवाना भी है|

ज़िंदगानी ता-कुजा सिर्फ़ जाम -बा सबु
बे खबर मयखना है,एक और मयखना भी है|

खैर है ज़ाहिद ये कैसा इन्क़िलाब आया है आज
तेरे हर अंदाज़ मे एक कैफ़े रिंदाना भी है|

हासीले हर जुस्तजु आख़िर यही निकला जिगर
इस्क खुद मंज़िल भी है,मंज़िल से बेगाना भी है|

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Apna hi sa ey-nargise mastana bana dena hindi-ghazal

अपना ही सा ए-नरगिसे मस्ताना बना देना
मैं जब तुझे जानू,मुझे दीवाना बना देना

हर क़ैद से हर रस्मे से,बेगाना बना दे
दीवाना बना दे मुझे दीवाना बना दे

हर वर्के अदा खीरेमन हस्ती पे गिरा कर
नज़रो को मेरी तूर का अफ़साना बना दे

हर दिल है तेरी बज़म मे लबरेज़ मेय इस्क
एक और भी पयमाने से पयमाना बना दे

तू सकी मयखना भी तू नशा बा मेय भी
मैं तिसना मस्ती मुझे मस्ताना बना दे

अल्ला ने तुजको मेय बा मयखना बनाया
तू सारी फ़ज़ा को मेय बा मयखना बना दे

तू सकी मयखना है मैं रिंदे बाला नोस
मेरे लिए मयखना को पयमाना बना दे

या दीदा-हा-बा दिल मे तू आप समा जा
या फिर दिल-बा-दीदा ही को बिरान बना दे

क़तरे मे वो दरया है जो आलम को डूबा-दे
ज़र्रे मे वो सहेरा है के दीवाना बना दे

लेकिन मुझे हर क़ैद-तईन से बचा कर
जो चाहे वो,ए नरगिसे-मस्ताना बना दे

आलम तो है,दीवाना जिगर,हुसन की खातिर
तू अपने लिए हुसन को दीवाना बना दे

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Haal dil ka tujse dil-e-aazar kahun ya na kahun hindi-ghazal

हाल दिल का तुज़से,दिले आज़ार कहूँ या ना कहूँ
खौफ है मा-नये इज़हार, कहूँ या ना कहूँ

नाम ज़ालिम का जब आता है, बिगड़ जाते हो
आसमान को भी सितम गार कहूँ या ना कहूँ

आख़िर इंसान हू मैं, सबर बा तहमुल कब तक
सैकड़ो सुन के भी दो चार कहूँ या ना कहूँ

हाथ क्यू रखते हो मु पर मेरे मतलब क्या क्या है
बा-इसे रंजिश बा-तकरार कहूँ या ना कहूँ

तुम सुनो या ना सुनो उस से तो कुछ बाइस नही
जो है कहेना मूज़े सो बार कहूँ या ना कहूँ

मुजसे कासिद ने कहा सुन के रबानी-ए-पैगाम
यही तो कहेना है दुस्बार कहूँ या ना कहूँ

कहे चुके गैर तो अफ़साने सब अपने अपने
मुजको क्या हुकुम है सरकार कहूँ या ना कहूँ

फिक़्र है, शोच है, तस्बीस है, क्या क्या कुछ है
दिल से भी इस्‍क के इसरार कहूँ या ना कहूँ

आप का हाल जो गैरो ने कहाँ है मुजसे
है मेरे कान घुंहेगार कहूँ या ना कहूँ

नही छुपती,नही छुपती,नही छुपती उलफत
सब कहे देते है आसार कहूँ या ना कहूँ

दाग है नाम मेरा वॉर्क तबीयत मेरी
गर्म इस तारहे के आसार कहूँ या ना कहूँ

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