Ajj rang hai he maa rang hai ri

आज रंग है ऐ माँ रंग है री,
मेरे महबूब के घर रंग है री।
अरे अल्लाह तू है हर,
मेरे महबूब के घर रंग है री।

मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
निजामुद्दीन औलिया-अलाउद्दीन औलिया।
अलाउद्दीन औलिया, फरीदुद्दीन औलिया,
फरीदुद्दीन औलिया, कुताबुद्दीन औलिया।
कुताबुद्दीन औलिया मोइनुद्दीन औलिया,
मुइनुद्दीन औलिया मुहैय्योद्दीन औलिया।
आ मुहैय्योदीन औलिया, मुहैय्योदीन औलिया।
वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।

अरे ऐ री सखी री,
वो तो जहाँ देखो मोरो (बर) संग है री।
मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
आहे, आहे आहे वा।
मुँह माँगे बर संग है री,
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।

निजामुद्दीन औलिया जग उजियारो,
जग उजियारो जगत उजियारो।
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।
मैं पीर पायो निजामुद्दीन औलिया।
गंज शकर मोरे संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखयो सखी री।
मैं तो ऐसी रंग देस-बदेस में ढूढ़ फिरी हूँ,
देस-बदेस में।
आहे, आहे आहे वा,
ऐ गोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।

सजन मिलावरा इस आँगन मा।
सजन, सजन तन सजन मिलावरा।
इस आँगन में उस आँगन में।
अरे इस आँगन में वो तो, उस आँगन में।
अरे वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।
आज रंग है ए माँ रंग है री।

ऐ तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मैं तो तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी सखी री।
ऐ महबूबे इलाही मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी।
देस विदेश में ढूँढ़ फिरी हूँ।
आज रंग है ऐ माँ रंग है ही।
मेरे महबूब के घर रंग है री।

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amir khusro quotes

खुसरो बाजी प्रेम की,
मैं खेलूं पी के संग।
जीत गई तो पी मेरे,
हारी तो पी के संग।।

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

बल बल जाऊं मैं, तोरे रंग रेजवा;
अपनी सी रंग दीन्ही रे, मोसे नैना मिलाइके।

नदी किनारे मै खड़ी सो पानी झिलमिल होए।
पी गोरी मैं सांवरी , अब किस विध मिलना होय।।

अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।।

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जा रोयेंगे, जैसे रणरेही का खेत।

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढांप तोहे दूं।
न मैं देखूं और न कोई, न तोहे देखन दूं।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चंद्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैन।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़े मोहे को चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिंदू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

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