Jane kis ki thi sada yaad nhi

जाने किस की थी ख़ता याद नहीं
हम हुए कैसे जुदा याद नहीं

एक शोला सा उठा था दिल में
जाने किस की थी सदा याद नहीं

एक नग़्मा सा सुना था मैं ने
कौन था शोला-नवा याद नहीं

रोज़ दोहराते थे अफ़्साना-ए-दिल
किस तरह भूल गया याद नहीं

इक फ़क़त याद है जाना उन का
और कुछ इस के सिवा याद नहीं

तू मिरी जान-ए-तमन्ना थी कभी
ऐ मिरी जान-ए-वफ़ा याद नहीं

हम भी थे तेरी तरह आवारा
क्या तुझे बाद-ए-सबा याद नहीं

हम भी थे तेरी नवाओं में शरीक
ताइर-ए-नग़मा-सरा याद नहीं

हाल-ए-दिल कैसे ‘तबस्सुम’ हो बयाँ
जाने क्या याद है क्या याद नहीं

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Ameer Khusro Farsi Kalam

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ
कि ताब-ए-हिज्राँ न-दारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ

शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह
सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ

यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं
किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ

चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़े-मेहर-ए-आँ-मह ब-गश्तम आख़िर
न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ

ब-हक़्क़-ए-आँ-मह कि रोज़-ए-महशर ब-दाद मा रा फ़रेब ‘ख़ुसरव’
सपीत मन के दुराय राखूँ जो जाए पाऊँ पिया की खतियाँ

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Ye kaisi kashma-kash hai jindagi me

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में
किसी को ढूँडते हैं हम किसी में

जो खो जाता है मिल कर ज़िंदगी में
ग़ज़ल है नाम उस का शाएरी में

निकल आते हैं आँसू हँसते हँसते
ये किस ग़म की कसक है हर ख़ुशी में

कहीं चेहरा कहीं आँखें कहीं लब
हमेशा एक मिलता है कई में

चमकती है अंधेरों में ख़मोशी
सितारे टूटते हैं रात ही में

सुलगती रेत में पानी कहाँ था
कोई बादल छुपा था तिश्नगी में

बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी
सलीक़ा चाहिए आवारगी में

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