ho gye nakam to pachhtaye kya Hindi Ghazal | Urdu Ghazal – Ghazal.

हो गए नाकाम तो पछताएँ क्या
दोस्तों के सामने शरमाएँ क्या

हो रहे हैं फ़ेल हम दो साल से
घर में जा कर अपना मुँह दिखलाएँ क्या

जब किसी सूरत नहीं इस से मफ़र
इम्तिहाँ के नाम से घबराएँ क्या

याद कर लें आज थोड़ा सा सबक़
मास्टर साहब के डंडे खाएँ क्या

जब गुरु जी ख़ुद नहीं समझे सवाल
अपने शागिर्दों को वो समझाएँ क्या

पढ़ नहीं सकते तो शैतानी करें
आ गए स्कूल में तो जाएँ क्या

आओ हम आपस में कुछ झगड़ा करें
खेल से अब अपना दिल बहलाएँ क्या

पूछते हैं मास्टर हम कौन हैं
कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या

जब कहीं ज़ौक़-ए-सुख़न-फ़हमी नहीं
‘कैफ़’ साहब की ग़ज़ल हम गाएँ क्या