Adoo Shayari

Adoo Shayari

Adoo Shayari

धोके खता रहा बार बार अदू से
फिर भी करता रहा ऐतबार अदू से

घूमता फिरता है ज़हन बा दिल में लिए
मसले ज़िन्दगी के हज़ार दुश्मन से

अपने मतलम की खातिर मेरे आप के
डालता है दिल-लो में दरार अपनों से

कोई आता नहीं मुद्दतों तक यहाँ
किस का करता है ये इन्तिज़ार अदू से

मसले रंज-बा-गम जाल फैलाए है
होता रहता है हर दम शिकार रकीब से

ठोकरे ज़ख़्म पर ज़ख़्म खाता रहा
चाहता है मगर इक्तिदार अदू से

इत्तिफाकन ही तुमको मिले तो मिले
सख्सियत से बहुत बा बेकार अदू से

बे-बसी मुफलिसी तंग-दस्ती का है
चलता फिरता इस्तिहार अदू से

भूल होती है सरज़द कभी न कभी
चाहे कितना ही हो होशयार अदू से

न-तबं ज़र्द चेरो पे अंजुम थकन
जिस तरफ देखिए बे-करार अदू से

अदू को दुश्मन या रकीब भी कहते है, अदू का कोई रूप नहीं है ,जिसे हम सब कुछ समझते है वही मेरा दुश्मन निकलता है
अदू को पैचान करना बहुत मुश्किल काम है आज के वक्त में
एसे लोग हर दौर में रहे है और आज भी है, हमें जिस के ऊपर सब से ज़ादा भरोसा होता है वही अपना दुश्मन निकलता है,

ज़िन्दगी के हर मुकाम पर अगर आप के साथ कोई अपना होगा तो साथ में आप का कोई रकीब भी होगा
एसे लोगो से न तो कोई आज तक बच पाया है न ही बच पायेगा, इनके बात करने का अंदाज़ इनकी हमदर्दी एसी होती है
की बहुत अच्छे या बहुत होशयार लोग भी धोका खा जाते है, एसे लोग हमेसा अपने मतलब के लिए ही मिलते है, जब इनका
काम हो जाता है, तो ये बहुत आसानी से आप को धोका दे कर चले जाते है

और आप खामोश हो जाते है किसी शायर ने इनकी फितरत से मिलते जुलते कुछ शेयर लिखे है, जो मुझको याद आते है
अदू की बे-वफाई पे वो शायद कुछ यूँ है की

Shayari Adoo hindi

अब कहाँ उनका हसीं साथ चलो सो जाये
फीकी फीकी है हर एक रात चलो सो जाये

मुन्तक़िल कर दे दिल-औ ज़हन कहीं और अपने
जान ले-लेना ये सदमात चलो सो जाये

हिजर की शब् तो यूँ ही जागते गुज़री सारी
अब सहर से है मुलाकात चलो सो जाये

इस में शायर अपने ख्याल को हसीन अंदाज़ में बयां कर रहा है

Adoo Shayari
Adoo Shayari

मोहब्बत की रह में भी रकीब आखरी हद तक कोई कसर नहीं रखता है, जब तक के वो दो दिलो को अलग न कर ले
हज़ार ऐब लगता है न जाने कितने फ़ितने फैलता है
कभी ज़ात का मसला कभी दौलत का, कभी समाज का कभी किसी का कभी का जहाँ पर प्यार होता है ये नफरत का बीज बोता
है लेकिन अफसोस की आज तक हम लोग एसे लोगो से अलग नहीं हो प् रहे है समज नहीं आता किस पे यकीन करे

मौसमे गुल में भी अब सोये सोये रहते है
अब कहा यार वो जज़्बात चलो सो जाये

अब कोई और भरम अपना रहा न क़ायम
खा चुके उन से भी अब मात चलो सो जाये

हुकुमरानी जहाँ फुलू की रहा करती थी
आज काँटों की है बरात चलो सो जाये

कर रहे है मुझे ज़ादा ही परेशान हर पल
ज़िन्दगी अब तेरे खाद-शात चलो सो जाये

अबर-आलूद फ़ज़ा हो गयी सा-फाफ अंजुम
हो चुकी आँखों से बरसात चलो सो जाये