Qateel Urdu Kalam in Hindi, Qateel is a famous shayar

अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को
मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को

मैं समुंदर भी हूँ मोती भी हूँ ग़ोता-ज़न भी
कोई भी नाम मिरा ले के बुला ले मुझ को

मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामाँ प्यारे
तू दबे-पाँव कभी आ के चुरा ले मुझ को

कल की बात और है मैं अब सा रहूँ या न रहूँ
जितना जी चाहे तिरा आज सता ले मुझ को

बादा फिर बादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील
शर्त ये है कोई बाँहों में सँभाले मुझ को