Aansu Shayari

Aansu Shayari

हमने मोहब्बत में एसी भी गुज़ारी कई रातें
जब तक आंसू न बहे दिल को आराम न आया

बहते आंसुओं की ज़ुबान नहीं होती
लफ़्ज़ों में मोहब्बत बयां नहीं होती

मिले जो प्यार तो क़दर करना
किस्मत हर किसी पर महेरबान नहीं होती

ज़ुबान से नाम लेते है आँखों से आंसू छलक जाते है
कभी किया करते हज़ारो बातें, आज एक बात को तरस जाते है

आँख बरसी है तेरे नाम पे साबन की तरह
जिस्म सुलगा है तेरी याद में ईंधन की तरह

लोरियां दी है किसी क़ुरब की ख्वाइस ने मुझे
कुछ जबानी के दिन भी गुज़रे है जबानी की तरहे

उस बुलंदी से तूने मुझे नवाज़ा क्यों था
गिर के मैं टूट गया काच के बर्तन की तरह

मुझसे मिलते हुए ये बात तो सोची होती
मैं तेरे दिल में समां जायूँ गए धड़कन की तरह

मुन्तज़िर है किसी मख़सूस सी आहट के लिए
ज़िन्दगी बैठी है दहलीज़ पे बिर-हमन की तरह

aansu shayri
aansu shayri

Aansu shayri

आंसू जब ही निकलते है जब दिल में दर्द होता है और दर्द में मोहब्बत होती है
मोहब्बत में एहसास होता है एहसास में ख़याल होता है ख्याल में यार होता है और यार
जब तक वफ़ा दार होता है ज़िन्दगी हसीं होती है बहरे होती है मोज़े होती रंगीनियां होती है
लेकिन जब महबूब किसी मज़बूरी में रु-बा-रु नहीं मिल पता है तो बेचैनी होती है और येही बे-चीनी दर्द
में मुब्तिला हो जाती है
येही दर्द रफ्ता रफ्ता दिल में घर कर लेता है और यार की यादें इतना परेशान करती है की
आँख से आंसू बहने लगते है

Aansu Ashak shayri

कभी रो कर मुस्कुराये, कभी मुस्कुरा के रोये
जब भी तेरी याद आयी तुझे भुला के रोये
एक तेरा ही तो नाम था जिसे हज़ार बार लिखा
जितना लिख कर खुश हुए, उस से ज़ादा मिटा के रोये

तस्बीर देख कर तेरी रोना वो हिजर में
रोने के बाद फिर वो तेरी तस्बीर देखना

आंसू की कोई अपनी पहचान नहीं होती है बस इनका रिस्ता ज़ादा तर गम से होता है
लेकिन कभी कभी आँख से आंसू खुसी में भी निकल आते है

 

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Hai tera tasabbur teri lagan dil tujse lagaye baithe hai [fana bulandi ghazal]

है तेरा तसब्बुर तेरी लगन दिल तुजसे लगाए बैठे है
एक याद में तेरी जाने जहाँ हम खुद को भुलाये बैठे है

झुकती है नज़र सजदे के लिए होती है नमाज़े इसक अदा
मिराजे इबादत क्या कहिये वो सामने आये बैठे है

नज़रो का तकाज़ा पूरा करो एक बार तो जलवा दिख ला दो
ये अहले जुनूँ ये दीवाने उम्मीद लगाए बैठे है

तस्लीम-बा-रज़ा की मंज़िल में दिल जान तो कोई चीज़ नहीं
हम तेरी अदाओ पर जाना ईमान लुटाये बैठे है

देखो तो ज़रा ये भोला पन इस नाज़ो अदा का क्या कहना
दिल ले के हमारा महफ़िल में नज़रो को छुपाये बैठे है

इस हुस्न पे दुनया मरती है एक हम नहीं शैदा उनके
मालूम नहीं ये कितनो को दीवाना बनाये बैठे है

हस्ती है सरबरे मस्ती में अब होश का दावा कौन करे
वो मस्त नज़र से हमको फ़ना मस्ताना बनाये बैठे

 

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Mareze gam ke saharo koi to baat karo Hindi-ghazal

मरीज़े गम के सहारो, कोई तो बात करो
उदास चाँद सितारों, कोई तो बात करो

कहा है, डूब चूका अब तो डूब ने वाला
सिकिस्ता दिल से किनारो, कोई तो बात करो

मेरे नसीब को बर्बादियों से निस्बत है
लूटी हुयी सी बहरो,कोई तो बात करो

कहाँ गया वो तुम्हारा बुलंदी-यो का जुनूँ
भुजे भुजे से शरारो कोई तो बात करो

इसी तरह से अजब क्या जो कुछ सुकून मिले
गेम फ़िराक के मारो कोई तो बात करो

तुम्हारा गम भी मिटाती है मस्तियाँ के नहीं
शराबे नाब के मारो कोई तो बात करो

तुम्हारी खाक उडाता नहीं सकेब तो क्या
उदास रहे गुज़र कोई तो बात करो

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Hindi Ghazal mansob the jo log meri zindagi ke sath Hindi ghazal

मंसूब थे जो लोग, मेरी ज़िन्दगी के साथ
अक्सर वही मिले है, बड़ी बे रूखी के साथ

यूँ तो मैं हस पड़ा हूँ, तुम्हारे लिए मगर
कितने सितारे टूट पड़े, एक हसी के साथ

फुर्सत मिले तो अपना गिरेबान भी देख ले
ए दोस्त यूँ न खेल मेरी ज़िन्दगी के साथ

मजबूरियो की बात चली है तो मय कहा
हम ने पिया ज़हर भी अक्सर खुसी के साथ

चेरे बदल बदल कर मिल रहे है लोग
इतना बुरा सुलूक मेरी सादगी के साथ

एक सज्दए खुलूस की कीमत फ़िज़ाए खुल्द
या रब न कर मज़ाक मेरी बंदगी के साथ

मोसिन करम लय भी हो जिसमे खुलूस भी
मुझको ग़ज़ब का प्यार है उसी दुश्मनी के साथ

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hindi shayri ey khuda aaj ye fasla kar de

अय खुदा आज ये फैसला कर दे,
मुझे उसका या उसे मेरा कर दे
बहुत दुख सहे है उसकी खातिर,
अब कोई खुसी मेरे मुकद्दर कर दे,
या ख़तम कर ये जिंदिगानी,
और मुझे फ़ना कर दे

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Nukta-che hai game dil usko sunaye na bane hindi-ghazal

नुकता ची है,ग़मे दिल उसको सुनाएँ ना बने
क्या बने बात,जहाँ बात बनाएँ ना बने |

मैं बुलाता तो हू उसको,मगर ए ज़ज़्बा-ए-दिल
उसपे बन जाएँ कुछ ऐसी,के बिन आएँ ना रहे |

खेल समझाँ है, कहीं छोड़,ना दे भूल ना जाएँ |
काश यू भी हो के बिन मेरे सताएँ ना बनें |

गैर फिरता है लिए यू तेरे ख़त को के अगर
कोई पूछे के ये क्या है,तो छुपाएँ ना बने |

उस नज़ाकत का बुरा हो,वो भले है तो क्या
हाथ आबे तो इन्हे हाथ लगाएँ ना बने |

कहे सके कौन के ये जलवा-गरि किस की है
परदा छोड़ा है, वो उसने के उठाएँ ना बने |

मौत की रहा देखु,के बिन आएँ ना रहे
तुम को चाहूं के ना तो बुलाएँ ना बने |

बोज वो सर से गिरा है,के उठाएँ ना बने
काम वो आन पड़ा है,के बनाएँ ना बने |

इस्क पर ज़ोर नही है,ये वो आतिश है ग़ालिब
के लगाएँ ना लगे,और भुजाएँ ना भुजे |

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Haal dil ka tujse dil-e-aazar kahun ya na kahun hindi-ghazal

हाल दिल का तुज़से,दिले आज़ार कहूँ या ना कहूँ
खौफ है मा-नये इज़हार, कहूँ या ना कहूँ

नाम ज़ालिम का जब आता है, बिगड़ जाते हो
आसमान को भी सितम गार कहूँ या ना कहूँ

आख़िर इंसान हू मैं, सबर बा तहमुल कब तक
सैकड़ो सुन के भी दो चार कहूँ या ना कहूँ

हाथ क्यू रखते हो मु पर मेरे मतलब क्या क्या है
बा-इसे रंजिश बा-तकरार कहूँ या ना कहूँ

तुम सुनो या ना सुनो उस से तो कुछ बाइस नही
जो है कहेना मूज़े सो बार कहूँ या ना कहूँ

मुजसे कासिद ने कहा सुन के रबानी-ए-पैगाम
यही तो कहेना है दुस्बार कहूँ या ना कहूँ

कहे चुके गैर तो अफ़साने सब अपने अपने
मुजको क्या हुकुम है सरकार कहूँ या ना कहूँ

फिक़्र है, शोच है, तस्बीस है, क्या क्या कुछ है
दिल से भी इस्‍क के इसरार कहूँ या ना कहूँ

आप का हाल जो गैरो ने कहाँ है मुजसे
है मेरे कान घुंहेगार कहूँ या ना कहूँ

नही छुपती,नही छुपती,नही छुपती उलफत
सब कहे देते है आसार कहूँ या ना कहूँ

दाग है नाम मेरा वॉर्क तबीयत मेरी
गर्म इस तारहे के आसार कहूँ या ना कहूँ

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