Nukta-che hai game dil usko sunaye na bane hindi-ghazal

नुकता ची है,ग़मे दिल उसको सुनाएँ ना बने
क्या बने बात,जहाँ बात बनाएँ ना बने |

मैं बुलाता तो हू उसको,मगर ए ज़ज़्बा-ए-दिल
उसपे बन जाएँ कुछ ऐसी,के बिन आएँ ना रहे |

खेल समझाँ है, कहीं छोड़,ना दे भूल ना जाएँ |
काश यू भी हो के बिन मेरे सताएँ ना बनें |

गैर फिरता है लिए यू तेरे ख़त को के अगर
कोई पूछे के ये क्या है,तो छुपाएँ ना बने |

उस नज़ाकत का बुरा हो,वो भले है तो क्या
हाथ आबे तो इन्हे हाथ लगाएँ ना बने |

कहे सके कौन के ये जलवा-गरि किस की है
परदा छोड़ा है, वो उसने के उठाएँ ना बने |

मौत की रहा देखु,के बिन आएँ ना रहे
तुम को चाहूं के ना तो बुलाएँ ना बने |

बोज वो सर से गिरा है,के उठाएँ ना बने
काम वो आन पड़ा है,के बनाएँ ना बने |

इस्क पर ज़ोर नही है,ये वो आतिश है ग़ालिब
के लगाएँ ना लगे,और भुजाएँ ना भुजे |