is taraf bhi karam aye rashq-e-masiha

इस तरफ भी करम एये रस्के मसीहा
करना
के तुम्हे आता है बीमार को अछा करना

ए ज़नू क्यू लिए जाता है बियबान मे मुझे
जब तुझे आता है घर को मेरे सहेरा करना

जब बज़ुज़ तेरे कोई दूसरा मोजूद नही
फिर समज मे नही आता तेरा परदा करना

यही दो काम है नाकामे मोहब्बत के लिए
कभी उनका का कभी तकदीर का शिकवा करना

पर्दाए हस्ती ओ मौहूब हटा दो पहले
फिर जहाँ चाहो वहाँ यार को देखा करना

शिकवा और शिकवाए महबूब ए इलाही तौबा
कुफ्र है मज़हब ए उस्सक मे शिकवा करना

ऐसी आँखो के तसदूक़ मेरी आँखे बेदम
के जिन्हें आता है अग्यार को अपना करना