Game isk rahe gaya hai game justaju ban kar Hindi ghazal

ग़मे इश्क रहे गया है, ग़मे जुस्तजू में ढलकर
वो नज़र से छुप गए है, मेरी ज़िन्दगी बदल कर

तेरी गुफ्तगू को नासे दिले गम-ज़दा से जल कर
अभी तक तो सुन रहा था मगर अब ज़रा संभल कर

न मिला सुरागे मंज़िल कहीं उम्र भर किसी का
नज़र आ गयी है मंज़िल कहीं दो कदम ही चल कर

ग़मे उम्र मुख़्तसर से अभी बे खबर है कलियाँ
न चमन में फेक देना किसी फूल को मसल कर

है किस के मुन्तज़िर हम मगर ए उम्मेदे मबहम
कहीं वक्त रहे न जाये यूही करबटें बदल कर

मेरी तेज़-गामियूं से नहीं वर्क को भी निस्बत
कहीं खो न जाये दुनया मेरे साथ साथ चल कर

कभी यक-बा-यक तबज्जो कभी दफ़अतन तगाफुल
मुझे आज़मा रहा है कोई रुख बदल बदल कर

हैं शकील ज़िन्दगी में ये जो बुसअतें नुमायाँ
इन्ही बुसअतें से पैदा कोई आलमे ग़ज़ल कर