adam se layi hai hasti me aarzuu-e-rasuul

आदम से लायी है हस्ती मे. आरज़ू-ए-रसूल
कहाँ कहाँ लिए फिरती है जुस्त्तजु-ए-रसूल

ख़ुशा वो दिल की हो जिस दिल मे आरज़ू-ए-रसूल
खुश वो आँख जो हो महवे-ए-हुस्न-ए-रुए-रसूल

तलाश-ए-नक़्श-ए-काफये-पा-ए-मुस्तफ़ा की क़सम
चुने है आखो से ज़रराटे-ए-ख़ाके क़ुए-ए-रसूल

फिर उन के नशा-ए-इरफ़ान का पुछना क्या है
जो पी चुके हैं अजल में माय सुब्बू-ए-रसूल

बलाए लू तेरी ऐ जज्ब-ए-शौक-ए-सल्ली-आला
की आज दमन-ए-दिल खिंच रहा है सू-ए-रसूल

शगुफ्ता गुलशन-ए-जहरा का हर गुल-ए-तर है
किसी में रंग-ए-अली और किसी में बू-ए-रसूल

अजब तमाशा हो मैदान-ए-हशर में ‘बेदम’
की सब हो पेश-ए-खुदा और मैं रु-ब-रु-ए-रसूल