Aasraa Shayari

Aasraa Shayari hindi

Aasraa Shayari

रहे जो ज़िन्दगी में ज़िंदगी का आसरा बन कर
वही मिले मैदाने मैशर में खुदा बन कर

हक़ीक़त तो हक़ीक़त है बुत कदे में है न काबे में है
निगाहे शोक भयका रही है रहनुमा बन कर

खिज़ा की हवा से गुलशन की हर पत्ती डरती है
की रंग ओ बू उड़ जायेगे एक दिन हवा बन कर

कुछ रोज़ पहले तक खुमिस्ता थे निगाहो में
ये दुन्याँ ही दो दिन में रहे गयी है क्या से क्या बन कर

मेरे सजदों की या रब तड़प क्यों नहीं जाती
ये कौन दर्द दिया अपने बन्दों को खुदा बन कर

बेचैन दिल में किस ने पे-वास्त कर दी है बेताबी
अज़ल में कौन छुप कर बैठा था मेरा दुसमन बन कर

ये गुज़री रात ये गुफ्तगू ये महो-अंजुम
निगाहे शोक बाहेक रही है इल्तिजा बन कर

बाला से हो हम अपनी ज़िद न छोड़े गे
हमेसा बे वफाओं से बा वफ़ा बन कर

Aasraa shayri ummed Shayari

आसरे को उम्मीद भी बोलते है ज़िंदगी की वो सारी कोशिस जो हम करते है किसी उम्मीद या आसरे पे करते है
जब हम किसी से कुछ उम्मीद रखते रखते है या कोई हम से उम्मीद करता है तो आसरा होता है
लेकिन जब हम किसी से न उम्मीद हो जाते है तो हम को तकलीफ होती है यानि हमारा दिल टूट जाता है
जो दर्द बन कर शायरी में तब्दील हो जाता है

तूने अपना बना कर नज़र फेर ली
मेरे दिल का सुकूं ना गहां लुट गया,

मुझको लूटा तेरे इश्क़ ने जान ए जां
मैं तेरे इश्क़ में जाने जां लुट गया।

असल में शायरी का रिस्ता दिल से होता है आप के एहसास से होता है आप जो भी ज़िंदगी में करते है जो तजुर्बा होता
है उसको काम अलफ़ाज़ में बयां करने के लिए शायरी वो जुबान है जो अदब और आप के हालात को बयां करने का
तरीका है जिसको मौसिकी के नाम से भी जाना जाता है

Aasraa Shayari
Aasraa Shayari

 

इन्सान फितरत से मामूर है वो जितनी उम्मीद या आसरा सामने वाले इंसान से रखता है
इतनी उम्मीद वो अपने रब या भगबान से नहीं करता है एहि वो वजह है की वो असल ज़िन्दगी न
में न उम्मीद होता है
अगर उसका सहारा कर उसका इसक रब है तो बाँदा असल में बाँदा होता है लेकिन अपना अपना इश्क
है अपना दर्द है अपनी ज़िन्दगी है