Aarzoo Shayari

Aarzoo Shayari

आरज़ू एक नदी हो जैसे
ज़िन्दगी तिस्ना-लबी हो जैसे

ये जबानी तेरी चाहत के बगैर
महज़ एक जामे तन्हाई हो जैसे

कल ही बिछड़े थे मगर लगता है
एक सदी बीत गयी हो जैसे

उम्र भर क़र्ज़ चुकाया उस का
ज़ीस्त बनने की बही हो जैसे

फसल चांदनी की उगाना सर पर
वक्त की जादू गारी हो जैसे

ज़ुल्म सहे कर भी है खिलकत खामोस
मोहर होंटो पे लगी हो जैसे

हर तरफ मौत का सन्नाटा है
शहर पर साध सटी हो जैसे

यूँ है एक मोड़ पर हैरान सी हयात
रास्ता भूल गयी हो जैसे

पड़ कर तारीख़ को एसा लगता है
ये मज़लूम की सदा हो जैसे

राख़ का ढेर है अब हसरते दिल
एक दुल्हन जल के मरी हो जैसे

शेर कहता हु सलीक़े से शबाब
ये भी आईना गरी हो जैसे

umeed-e-Aarzoo

जब ही होती है जब हम किसी से मोहब्बत करते है लफ़्ज़े आरज़ू वो है जो उम्मीद होती है हमारी
किसी से हम-कलाम होनाअपने अंदाज़ को बयां करना Aarzoo shayri के ज़रिये उस की चाहत करना या उसका ख्याल करना उसके बारे में सोचते रहना
अपनी ज़िंदगी को उस के हिसाब से गुज़ारना बे-चैन रहना, बे-क़रार रहना ख़याले यार में मसरूफ रहना ये
सब आरज़ू होती है
किसी ने क्या खूब कहा है

हुस्न को बे-नक़ाब देखा है
आरज़ूओं का ख्याब देखा है
और भी कुछ हो इश्क़ में शायद
मैंने बस इज़्तिराब देखा है
पहलू-ए-गैर में अरे तौबा
किस क़यामत का ख्वाब देखा है

aarzoo shayri
aarzoo shayri

आप की सोच ही आरज़ू है ज़रूरी नहीं की आप सिर्फ जिस से प्यार करते है वही आरज़ू हो वो सारे काम जो करना कहते है
आप की तम्मना होती है आप का टारगेट होता है
वही आरज़ू होती है उम्मीद का नाम ही आरज़ू है आप की सोच ही आरज़ू है

जब ये निगेटिव हो जाती है तो आदमी टूट जाता है और परेशान हो जाता है,
इस लिए हमेसा पोस्टिव सोच रखे दूसरे से ज़ादा अपने पे यकीन रखे

कौन किस को यहाँ भला समझा, हमने क्या समझा तुमने क्या समझा
बे वफ़ा हमने तुमको समझा सनम ,तुमने हमको ही बे वफ़ा समझा